<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8303159118575992866</id><updated>2012-02-07T15:14:33.470-08:00</updated><category term='बाबरी मसजिद विवाद'/><category term='भारतीय मुसलमान और आतंकवाद'/><category term='जिन्ना और भारतीय मुसलमान'/><category term='ramzan'/><category term='संघ और मुसलमान'/><title type='text'>मुसलमान...भारत देश हमारा भी है</title><subtitle type='html'>हम लोग कुछ सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्षरत ऐसे भारतीय हैं, जिन्हें इस देश से उतना ही प्यार है, जितना आपको है। देश के वातावरण में इन ताकतों ने जो जहर घोल दिया है, उसका विरोध बहुत जरूरी है। कृपया हमारा साथ दें।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://muslimsviews.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://muslimsviews.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Muslims Views</name><uri>http://www.blogger.com/profile/12277674573030441244</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>6</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8303159118575992866.post-7594403772121551918</id><published>2010-02-27T12:05:00.000-08:00</published><updated>2010-02-27T12:16:22.773-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संघ और मुसलमान'/><title type='text'>मुसलमान पिटने के लिए है</title><content type='html'>यह लेख भड़ास ब्लॉग से साभार लिया गया है। इस ब्लॉग में जो बातें मुख्य रूप से उभारी गई हैं, वह यह है कि मुसलमान पिटने के लिए बना है। हालांकि इसमें अमेरिका और संघ परिवार को दिखाने के लिए इस ढंग से गाली दी गई है कि आप लेख और लेखक के बारे में ठीक तरह से अंदाजा न लगा सकें लेकिन लेख का असली लक्ष्य कुछ और है। भड़ास एक सफल ब्लॉग है और उसकी वेबसाइट भी अच्छा चल रही है। उसके मंच का इस तरह इस्तेमाल कुछ उचित नहीं लग रहा। बहरहाल, उस लेख को यहां इसलिए पेश किया जा रहा है कि आप भी पढ़ें और अपनी राय यहां दें। हो सकता है कि इस लेख के बारे में मेरा विश्लेषण गलत हो। निर्णय आपको करना है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शीत युद्ध में मुसलमानों के खिलाफ आरएसएस-अमेरिका भाई-भाई&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;-जगदीश्वर चतुर्वेदी&lt;br /&gt; साम्प्रदायिकता का आक्रामक उभार और विकास हमारे देश में शीतयुध्द के साथ तेजी से हुआ है। यह विश्व में उभर रही आतंकी-साम्प्रदायिक विश्व व्यवस्था का हिस्सा है। यह दिखने में लोकल है किंतु चरित्रगत तौर ग्लोबल है। इसकी ग्लोबल स्तर पर सक्रिय घृणा और नस्ल की विचारधारा के साथ दोस्ती है। याराना है। भारत में राममंदिर आंदोलन का आरंभ ऐसे समय होता है जब शीतयुद्ध चरमोत्कर्ष पर था।&lt;br /&gt;शीतयुध्द के पराभव के बाद अमरीका ने खासतौर पर इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ हमलावर रूख अख्तियार कर लिया है। इसके नाम पर अंतर्राष्ट्रीय मुहिम भी चल रही है, ग्लोबल मीडिया इस मुहिम में सबसे बड़े उपकरण बना हुआ है। मुसलमानों और इस्लामिक देशों पर तरह-तरह के हमले हो रहे हैं। इस विश्वव्यापी इस्लाम -मुसलमान विरोधी मुहिम का संघ परिवार वैचारिक-राजनीतिक सहयोगी है। फलत: ग्लोबल मीडिया का गहरा दोस्त है।&lt;br /&gt;संघ परिवार ने इस्लाम धर्म और मुसलमानों को हमेशा विदेशी ,अनैतिक ,शैतान और हिंसक माना । इसी अर्थ में वे इस्लाम और मुसलमान के खिलाफ अपने संघर्ष को देवता अथवा भगवान के लिए किए गए संघर्ष के रूप में प्रतिष्ठित करते रहे हैं। अपनी जंग को राक्षस और भगवान की जंग के रूप में वर्गीकृत करके पेश करते रहे हैं। शैतान के खिलाफ जंग करते हुए वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन तमाम राष्ट्रों के साथ हैं जो शैतानों के खिलाफ जंग चला रहे हैं। इस अर्थमें संघ परिवार ग्लोबल पावरगेम का हिस्सा है। चूंकि इस्लाम-मुसलमान हिंसक होते हैं अत: उनके खिलाफ हिंसा जायज है,वैध है। हिंसा के जरिए ही उन्हें ठीक किया जा सकता है। वे मुसलमानों पर हमले इसलिए करते हैं जिससे हिन्दू शांति से रह सकें। हिन्दुओं के शांति से रहने के लिए मुसलमानों की तबाही करना जरूरी है और यही वह तर्क है जो जनप्रियता अर्जित करता जा रहा है। दंगों को वैध बना रहा है। दंगों को गुजरात में बैध बनाने में इस तर्क की बड़ी भूमिका है। 'शांति के लिए मुसलमान की मौत' यही वह साम्प्रदायिक स्प्रिट है जिसमें गुजरात से लेकर सारे देश में दंगों और दंगाईयों को वैधता प्रदान की गई है। यही वह बोध है जिसके आधार साम्प्रदायिक हिंसा को वैधता प्रदान की जा रही है।&lt;br /&gt;     संघ परिवार पहले प्रतीकात्मक हमले करता है और बाद में कायिक हमले करता है। प्रतीकों के जरिए संघ परिवार जब हमले करता है तो प्रतीकों के दबाव में सत्ताा को भी ले आता है। वे कहते हैं यदि एक हिन्दू मारा गया तो बदले में दस मुसलमान मारे जाएंगे। वे मौत का बदला और भी बड़ी भयानक मौत से लेने पर जोर देते हैं। वे मुसलमानों की मौत के जरिए व्यवस्था को चुनौती देते हैं। हिन्दुओं में प्रेरणा भरते हैं। व्यवस्था को पंगु बनाते हैं। अपने हिंसाचार को व्यवस्था के हिंसाचार में तब्दील कर देते हैं। साम्प्रदायिकता आज पिछड़ी हुई नहीं है। बल्कि आधुनिकता और ग्लोबलाईजेशन के मुखौटे में जी रही है। मोदी का विकास का मॉडल उसका आदर्श उदाहरण है। इस्लाम,मुसलमान के प्रति हिंसाचार,आधुनिकतावाद और भूमंडलीकरण ये चारों चीजें एक-दूसरे अन्तर्गृथित हैं। इस अर्थ में साम्प्रदायिकता के पास अपने कई मुखौटे हैं जिनका वह एक ही साथ इस्तेमाल कर रही है और दोहरा-तिहरा खेल खेल रही है।&lt;br /&gt;      आज प्रत्येक मुसलमान संदेह की नजर से देखा जा रहा है। प्रत्येक मुसलमान को राष्ट्रद्रोही की कोटि में डाल दिया गया है। मुसलमान का नाम आते ही अपराधी की शक्ल, आतंकवादी की इमेज आंखों के सामने घूमने लगती है। कल तक हम मुसलमान को नोटिस ही नहीं लेते थे अब उस पर नजर रखने लगे हैं। इसे ही कहते हैं संभावित अपराधीकरण। इस काम को संघ परिवार और ग्लोबल मीडिया ने बड़ी चालाकी के साथ किया है। इसे मनोवैज्ञानिक साम्प्रदायिकता भी कह सकते हैं।&lt;br /&gt;      साम्प्रदायिक दंगों को संघ परिवार साम्प्रदायिक दंगा नहीं कहता,बल्कि जबावी कार्रवाई कहता है। यही स्थिति भाजपा नेताओं की है वे भी साम्प्रदायिक दंगा पदबंध का प्रयोग नहीं करते। बल्कि प्रतिक्रिया कहते हैं। उनका तर्क है हिंसा हमेशा 'वे' आरंभ करते हैं। 'हम' नहीं। साम्प्रदायिक हिंसाचार अथवा दंगा कब शुरू हो जाएगा इसके बारे में पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं है।  इसी अर्थ में दंगा भूत की तरह आता है। भूतघटना की तरह घटित होता है। दंगा हमेशा वर्चुअल रूप में होता है सच क्या है यह अंत तक नहीं जान पाते और दंगा हो जाता है। हमारे पास घटना के कुछ सूत्र होते हैं,संकेत होते हैं। जिनके जरिए हम अनुमान कर सकते हैं कि दंगा क्यों हुआ और कैसे हुआ। दंगे के जरिए आप हिंसा अथवा अपराध को नहीं रोक सकते। (संघ परिवार का यही तर्क है कि दंगा इसलिए हुआ क्योंकि मुसलमानों ने अपराध किया,वे हिंसक हैं) ,दंगे के जरिए आप भगवान की स्थापना अथवा लोगों की नजर में भगवान का दर्जा भी ऊँचा नहीं उठा सकते।&lt;br /&gt;      दंगे के जरिए आप अविवेकपूर्ण जगत को विवेकवादी नहीं बना सकते।  मुसलमानों का कत्लेआम करके जनसंख्या समस्या का समाधान नहीं कर सकते। मुसलमानों को भारत में पैदा होने से रोक नहीं सकते। मुसलमानों को मारकर आप सुरक्षा का वातावरण नहीं बना सकते। मुसलमानों को पीट-पीटकर तटस्थ नहीं बनाया जा सकता। मुसलमानों की उपेक्षा करके ,उनके लिए विकास के सभी अवसर छीनकर भी सामाजिक जीवन से गायब नहीं कर सकते। हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा कि मुसलमान और इस्लाम धर्म हमारी वैविध्यपूर्ण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। आप इस्लाम और मुसलमान के खिलाफ चौतरफा आतंक और घृणा पैदा करके इस देश में सुरक्षा का वातावरण और स्वस्थ लोकतंत्र स्थापित नहीं कर सकते।   &lt;br /&gt;       मुसलमान और इस्लाम लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं है। लोकतंत्र को कभी अल्पसंख्यकों से खतरा नहीं हुआ बल्कि बहुसंख्यकों ने ही लोकतंत्र पर बार-बार हमले किए हैं। जिन दलों का बहुसंख्यकों में दबदबा है वे ही लोकतंत्र को क्षतिग्रस्त करते रहे हैं। आपात्काल, सिख जनसंहार,गुजरात के दंगे,नंदीग्राम का हिंसाचार आदि ये सभी बहुसंख्यकों के वोट पाने वाले दलों के द्वारा की गई कार्रवाईयां हैं। मुसलमानों के खिलाफ हिंसाचार में अब तक साम्प्रदायिक ताकतें कई बार जीत हासिल कर चुकी हैं। साम्प्रदायिक जंग में अल्पसंख्यक कभी भी जीत नहीं सकते बल्कि वे हमेशा पिटेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8303159118575992866-7594403772121551918?l=muslimsviews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://muslimsviews.blogspot.com/feeds/7594403772121551918/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8303159118575992866&amp;postID=7594403772121551918' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/7594403772121551918'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/7594403772121551918'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://muslimsviews.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='मुसलमान पिटने के लिए है'/><author><name>Muslims Views</name><uri>http://www.blogger.com/profile/12277674573030441244</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8303159118575992866.post-7617321133028472684</id><published>2009-09-09T12:04:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T12:12:17.817-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भारतीय मुसलमान और आतंकवाद'/><title type='text'>कौन सुनेगा इस मां की करूण पुकार</title><content type='html'>गुजरात में इशरतजहां और अन्य मुस्लिम युवकों को वर्ष 2004 में फर्जी मुटभेड़ में मार गिराने के मुद्दे पर देशव्यापी बहस हो रही है और गुजरात हाई कोर्ट ने उस न्यायिक जांच रिपोर्ट पर रोक लगा दी है, जिसने इसकी जांच की थी। इस विषय पर कुछ ब्लॉगों और वेबसाइटों में जो लिखा गया है, उसे हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। नीचे आप शेष नारायण सिंह का लेख पढ़ चुके हैं। अब इसी क्रम में यह लेख हमने हिंदीवाणी ब्लॉग से लिया है, साभार सहित।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;-यूसुफ किरमानी&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;ब्रेकिंग न्यूज...वह आतंकवादी की मां है, उसकी लड़की लश्कर-ए-तैबा से जुड़ी हुई थी। उसका भाई भी लश्कर से ही जुड़ा मालूम होता है। इन लोगों ने लश्कर का एक स्लीपर सेल बना रखा था। इनके इरादे खतरनाक थे। ये लोग भारत को छिन्न-भिन्न कर देना चाहते थे। यह लोग आतंकवाद को कुचलने वाले मसीहा नरेंद्र मोदी की हत्या करने निकले थे लेकिन इससे पहले गुजरात पुलिस ने इनका काम तमाम कर दिया।&lt;br /&gt;कुछ इस तरह की खबरें काफी अर्से बाद हमें मुंह चिढ़ाती नजर आती हैं। अर्से बाद पता चलता है कि सरकारी एजेंसियों ने मीडिया का किस तरह इस्तेमाल किया था। आम लोग जब कहते हैं कि मीडिया निष्पक्ष नहीं है तो हमारे जैसे लोग जो इस पेशे का हिस्सा हैं, उन्हें तिलमिलाहट होती है। लेकिन सच्चाई से मुंह नहीं चुराना चाहिए। अगर आज मीडिया की जवाबदेही (Accountability of Media ) पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो यह ठीक हैं और इसका सामना किया जाना चाहिए। मीडिया की जो नई पीढ़ी इस पेशे में एक शेप ले रही है और आने वाले वक्त में काफी बड़ी जमात आने वाली है, उन्हें शायद ऐसे सवालों का जवाब कुछ ज्यादा देना पड़ेगा।&lt;br /&gt;गुजरात में हुए फर्जी एनकाउंटर (Fake Encounters) की खबरें आज हमें मुंह चिढ़ा रही हैं। विश्व भर में तमाम फोरमों पर, अखबारों में और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में इन सवालों को उठा कर सवाल पूछे जा रहे हैं। इशरतजहां और कुछ अन्य युवकों का गुजरात में 2004 में किया गया एनकाउंटर इस समय बहस के केंद्र में है। इस एनकाउंटर को अंजाम देने वाले पुलिस अफसर डी. जी. बंजारा पहले से ही जेल में हैं और उन्हें एक फर्जी एनकाउंटर (सोहराबुद्दीन केस) में दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है। वर्ष 2004 का ऐसा समय था जब गुजरात में फर्जी एनकाउंटरों की बाढ़ लग गई थी और बंजारा नामक इस अधिकारी को गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी तरक्की पर तरक्की देते जा रहे थे। लेकिन उन एनकाउंटरों की खबरें छापने वाले अखबार और टीवी न्यूज चैनल आज कहां खड़े हैं। मीडिया ने इन खबरों की सत्यता जांचे बिना खूब हवा दी और इसने समाज के ताने-बाने पर भी जबर्दस्त असर डाला। &lt;br /&gt;आज के अखबारों और न्यूज चैनलों पर नजर डालें तो सब के सब गुजरात पुलिस को विलेन बनाते नजर आएंगे। सारे के सारे अखबारों में अगर संपादकीय पर नजर डालें तो वे मोदी और गुजरात पुलिस को कटघरे में खड़े करते नजर आएंगे। इनमें से कोई यह लिखने या कहने को तैयार नहीं है कि जब उसने इस फर्जी एनकाउंटर को ब्रेकिंग न्यूज बताकर पूरे देश को झकझोर दिया था और देश में हर मुसलमान पर आतंकवादी होने का शक जताया जा रहा था तब उसने गलती की थी और अब उसे माफी मांगनी चाहिए। हद तो यह है कि इशरतजहां के मामले में केंद्रीय गृहमंत्रालय (MHA) तक ने कोर्ट में शपथपत्र दिया कि एनकाउंटर में मारे गए युवक-युवतियों के संबंध लश्कर-ए-तैबा से थे। &lt;br /&gt;आतंकवादी की मां होने पर जो बयान इशरतजहां की मां शमीमा कौसर ने दिया है, वह बताता है कि कैसे ऐसी घटनाएं हमारे सामाजिक ढांचे को झकझोर देती हैं। शमीमा कौसर ने कहा कि जब उनकी बेटी को आतंकवादी बताकर मार डाला गया तो मुंबई के ठाणे इलाके में जहां वह रहती हैं, वह उनका सामाजिक बहिष्कार (Social Boycott) कर दिया गया। उनके अन्य बेटे-बेटी जो स्कूल-कॉलेज में पढ़ रहे थे, उनका नाम वहां से काट दिया गया और वे आगे पढ़ाई नहीं कर सके। वे जहां जाते लोग उनके बारे में यही कहते थे कि देखो आतंकवादी की मां जा रही है, देखो आतंकवादी की बहन जा रही है, देखो आतंकवादी का भाई जा रहा है। किसी एक कंपनी में इशरतजहां की बहन को रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिली हुई है लेकिन वहां भी उसे अपनी पहचान छिपानी पड़ी। अहमदाबाद हाई कोर्ट ने जिस जज एस. पी. तमांग से इसकी जांच कराई, उसकी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह परिवार सामने आने की हिम्मत जुटा सका। &lt;br /&gt;यह कोई एक केस नहीं है। गोधरा दंगों (Godhara Riots) के दौरान नरौदा पाटिया में जो कुछ हुआ, उस पर फिल्म बन चुकी है। गुलबर्गा सोसायटी में सांसद एहसान जाफरी के परिवार और अन्य लोगों को जिस तरह जिंदा जला दिया गया, उसकी कहानी हर कोई जानता है। कुछ गवाहों को गुजरात सरकार द्वारा रिश्वत की पेशकश का मामला स्टिंग आपरेशन से सामना आ चुका है। लेकिन मीडिया की हिम्मत नहीं पड़ी कि वह इन केसों के खिलाफ उठकर खड़ा हो। अहमदाबाद में टाइम्स आफ इंडिया (The Times of India) के पत्रकारों ने जब थोड़ी सी हिम्मत दिखाकर मोदी के खिलाफ लिखा तो लोकतंत्र की पक्षधर वहां की बीजेपी सरकार ने टाइम्स आफ इंडिया के उन पत्रकारों के खिलाफ केस दर्ज करा दिया।   &lt;br /&gt;ये सारी घटनाएं हमें 1984 की याद दिलाते हैं। जहां इस देश में खालिस्तान आंदोलन (Khalistan Separatist Agitation ) चरम पर था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की जा चुकी थी। उस समय इसी तरह हर सिख को आतंकवादी समझा जा रहा था। मैं ऐसी तमाम घटनाओं का गवाह हूं। हरियाणा होकर दिल्ली आने वाली पंजाब रोडवेज की बसों को रोक लिया जाता था और हरियाणा पुलिस सिखों की पगड़ियां उतरवाकर यह देखती थी कि कहीं उनमें हथियार तो नहीं ले जाए जा रहे हैं। इन हरकतों का नतीजा क्या निकला...पंजाब में उस समय हिंदू-सिखों के बीच खाई बढ़ती चली गई। सारे सामाजिक ढांचे (Social Setup) पर करारी चोट पड़ी, जो सिख देशभक्त थे, उन्हें मजबूर किया गया कि वे आतंकवादियों के हमदर्द बनें या उन्हें अपने घरों में पनाह दें। पंजाब में जो कुछ हुआ, वह कांग्रेस की देन थी और वह आज तक माफी मांग रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जिस दिन देश की बागडोर संभाली, उसी दिन उन्होंने सबसे पहले सिखों से माफी मांगी।&lt;br /&gt;सिख एक मेहनतकश कौम है और उसने दिखा दिया कि वे आतंकवादी नहीं हैं। विदेशों से जब खालिस्तान आंदोलन को मदद मिलना बंद हो गई तो यह किस्सा भी अपनेआप खत्म हो गया। जो लोग समझते हैं कि किसी के. पी. एस. गिल नामक पुलिस अफसर ने पंजाब में आतंकवाद खत्म किया, यह उनकी भूल है। जिन्होंने पंजाब को नजदीक से देखा है, वे इस बात को समझ सकते हैं।&lt;br /&gt;इशरतजहां की मां और उसकी बहन मुशरतजहां ने भी यही कहा कि हम भारतीय हैं। हमें इस देश से उतना ही प्यार है जितना बीजेपी वालों को है। फिर भी हमें शक से देखा जाना, अफसोस की बात है।&lt;br /&gt;आतंकवाद एक ऐसी समस्या के रूप में सामने आया है जिसने विशेषकर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को कुछ ज्यादा ही परेशान कर रखा है। जिस पाकिस्तान पर भारत में आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया जाता है (जो सबूतों के आधार पर ठीक भी है), वह खुद आज सबसे बड़ा आतंकवाद का शिकार है। वहां की प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या को ज्यादा दिन अभी नहीं बीते हैं। हम लोगों को और खासकर मीडिया को आतंकवाद को किसी मजहब या जाति से जोड़ना छोड़कर इसके सामाजिक और आर्थिक पक्ष को देखना होगा। इसमें उन कोनों को तलाशना होगा कि आखिर क्यों अमेरिका पहले ओसामा बिन लादेन (Osama bin laden) को पालता है, क्यों इंदिरा गांधी ने जनरैल सिंह भिंडरावाले को खड़ा किया, क्यों बजरंग दल ने दारा सिंह को उड़ीसा में ईसाई मिशनरियों के खिलाफ विष वमन करने भेजा, क्यों गांधी जी की हत्या में अभी तक नाथूराम गोडसे की आड़ में किसी संगठन विशेष का नाम लिया जाता है, क्यों राजीव गांधी ने पहले लिट्टे की मदद की...क्यों प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू यूएन के सामने कश्मीर में जनमत संग्रह कराने के लिए राजी हुए...ये सुलगते सवाल हैं। इतिहास में यह सब दर्ज है। गहन छानबीन से आतंकवाद की जड़ों तक पहुंचा जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;साभार -&lt;span style="font-weight:bold;"&gt; हिंदीवाणी ब्लॉग स्पॉट डॉट कॉम&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8303159118575992866-7617321133028472684?l=muslimsviews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://muslimsviews.blogspot.com/feeds/7617321133028472684/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8303159118575992866&amp;postID=7617321133028472684' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/7617321133028472684'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/7617321133028472684'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://muslimsviews.blogspot.com/2009/09/blog-post_09.html' title='कौन सुनेगा इस मां की करूण पुकार'/><author><name>Muslims Views</name><uri>http://www.blogger.com/profile/12277674573030441244</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8303159118575992866.post-7669671876814923146</id><published>2009-09-08T05:03:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T12:21:03.225-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भारतीय मुसलमान और आतंकवाद'/><title type='text'>क्योंकि इशरतजहां मुसलमान थी</title><content type='html'>&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;-शेष नारायण सिंह &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हत्यारी पुलिस, सांप्रदायिक सरकार, गैर-जिम्मेदार मीडिया :&lt;/strong&gt; एक बहुत बडे़ टीवी न्यूज चैनल के न्यूज सेक्शन के कर्ताधर्ता, जो उस वक्त तक मेरे मित्र थे, ने जब इशरत जहां की हत्या को इस तरह से अपने चैनल पर पेश करना शुरू किया जैसे देश की सेना किसी दुश्मन देश पर विजय करके लौटी हो, तो मैंने उन्हें याद दिलाया कि खबर की सच्चाई जांच लें। इतना सुनते ही वे बिफर पडे़ और कहने लगे कि उनके रिपोर्टर ने जांच कर ली है और उन्हें अपने रिपोर्टर पर भरोसा है। मैं न सिर्फ चुप हो गया बल्कि उनसे दोस्ती भी खत्म कर ली। वे श्रीमानजी टीवी के सबसे वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार किए जाते हैं। टीवी के कारण उनकी संकुचित हो गई सोच पर मुझे घोर आश्चर्य हुआ। बात सिर्फ सबसे बड़े न्यूज चैनल की ही नहीं है। उस दौर में इशरत जहां को ज्यादातर टीवी न्यूज चैनलों ने पाकिस्तानी जासूस बताया। &lt;br /&gt;उन सभी टी.वी. चैनलों को अब चाहिए कि वे राष्ट्र से न सिर्फ माफी मांगें बल्कि शर्म से अपना सिर कुछ देर के लिए झुका भी लें। दरअसल, मुसलमानों को फर्जी मामलों में मार डालने के गुजरात सरकार के एक और कारनामे से पर्दा उठने के बाद अब मीडिया को चाहिए कि मोदी के राज में हुए सभी मुठभेड़ों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने के लिए आवाज उठाए। इशरत जहां मामले में गैर-जिम्मेदारी दिखा चुकी मीडिया के लिए यही प्रायश्चित भी होगा। &lt;br /&gt;जून 2004 में गुजरात पुलिस के बडे़ अधिकारियों ने बंबई से इशरत जहां और उसके तीन साथियों को उठाकर हत्या करने के बाद इसे मुठभेड़ बता दिया था। प्रचार यह किया गया कि मारे गए चारों लोग लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य हैं और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने जा रहे थे। इस हत्याकांड के भी सरगना वही पुलिस अधिकारी हैं जो सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ में हुई हत्या में आजकल जेल में हैं। स्पष्ट हो गया है कि डी.जी. बंजारा नाम का पुलिसिया डीआईजी एक गैंग बनाकर हत्या, लूट और डकैती की घटनाओं को अंजाम देता था। उसके सभी साथी पुलिस वाले ही होते थे। सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ कांड में जिन पुलिस वालों को सजा हुई है, वे सभी इशरत जहां और उसके साथियों के फर्जी मुठभेड़ में शामिल थे।&lt;br /&gt;यह सारी जानकारी अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एसपी तमांग की जांच से मिली है। अपनी 243 पेज की हाथ से लिखी गई रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट ने कहा है कि इन पुलिस वालों ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करके नौकरी में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के चक्कर में निरीह और निहत्थे नौजवानों को मार डाला। जांच से पता चला कि मुंबई से डी.जी. बंज़ारा के गिरोह ने इशरत जहां और अन्य तीन लड़कों का अपहरण 12 जून को किया था। इनका फर्जी मुठभेड़ 14 जून 2004 के दिन दिखाया गया। यानी इन बच्चों को दो दिन तक अगवा करके रखा। मुठभेड़ के बाद गुजरात सरकार ने दावा किया कि मारे गए लोगों में से दो पाकिस्तानी नागरिक हैं। वह भी गलत है। चारों बच्चे भारतीय थे और आतंक से उनका कोई लेना-देना नहीं था। पुलिस ने इन लोगों की गाड़ी में हथियार और गोला बारूद भी बरामद किया था। मजिस्ट्रेटी जांच से पता चला कि सारे हथियार पुलिस वालों ने ही गाड़ी में रखा था।&lt;br /&gt;मजिस्ट्रेट एस.पी. तमांग की रिपोर्ट ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम जंगल से भी घटिया कानून के राज में निवास कर रहे हैं? अगर निर्दोष निहत्थे और मामूली इंसान को मार डालने से कोई मुख्यमंत्री इतना खुश हो जाएगा कि मारने वालों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दे देगा, तो उस मुख्यमंत्री की सोच व विजन का स्तर क्या है, यह आसानी से समझा जा सकता है। मोदी एक ऐसी जमात से ताल्लुक रखते हैं जो मुसलमानों को तबाह करने की राजनीति पर काम करती है। 1925 में अपनी स्थापना के बाद आर.एस.एस. ने 1927 में नागपुर में योजनाबद्ध तरीके से पहला दंगा करवाया था। तबसे मुसलमानों के खिलाफ इनका 'प्रोग्राम' चल रहा है। गुजरात में सरकार बनी तो गोधरा कांड करके राज्य में मुसलमानों को तबाह करने की योजना पर अमल किया गया। जब अफसरों ने देखा कि मुख्यमंत्री मुसलमानों के खून से खुश होता है तो उन्होंने भी निरीह सीधे-साधे और गरीब लोगों को आतंकवादी बताकर मारने का सिलसिला शुरू कर दिया। सोहराबुद्दीन शेख और इशरत जहां की निर्मम हत्या की कलई तो खुल गई लेकिन जब से मोदी सरकार में आए हैं, बहुत सारे फर्जी मुठभेड़ हुए हैं। सभ्य समाज को आवाज उठाना चाहिए कि मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जितने भी मुठभेड़ हुए हैं, सबकी न्यायिक जांच करवाई जाय। मोदी के राज में इस तरह के 28 फर्जी मुठभेड़ हो चुके हैं।&lt;br /&gt;मोदी की राजनीति ही नफरत की है। उन्होंने यह आर.एस.एस. से सीखा है। मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाना और दंगे कराना इनकी रणनीति में शामिल है। पर सरकारी अफसरों का दंगे की राजनीति का औजार बनना देश के लिए दुर्भाग्य की बात है। ये अफसर जब नौकरी में आते हैं तो संविधान पालन की शपथ लेते हैं। फिर भी ऐसे काम करते हैं जो हमारे धर्मनिरपेक्ष संविधान को अपमानित करता है। यहां यह समझ लेना जरूरी है कि संघ की राजनीति का औजार बनने के लिए उतावले अफसर गुजरात के बाहर भी हैं। उनमें से कुछ अफसर भारत सरकार के गृह मंत्रालय में जिम्मेदारी की पोजीशन पर बैठे है। इशरत जहां के फर्जी इनकाउंटर की जांच का काम नरेंद्र मोदी के वफादार अफसरों ने करके लीपापोती कर दी थी। मामला अदालत में गया और सी.बी.आई. को भी पार्टी बनाया गया। सी.बी.आई. ने कहा कि अगर अदालत का हुक्म होगा तो वह जांच का जिम्मा ले लेगी। इस बात से गुजरात और केंद्र सरकार के कुछ अफसर कांप उठे। ये वही अफसर थे जो एनडीए की सरकार में उनकी अर्दली बजाते थे और अब जुगाड़ करके गृह मंत्रालय में बैठे हैं। लिहाजा गृह मंत्रालय की ओर से इस मुकदमे में एक हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें कहा गया कि इशरत जहां और उसके बाकी तीनों लोग पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के सदस्य थे। केंद्र सरकार इस मामले को सी.बी.आई जांच के लायक नहीं मानती।&lt;br /&gt;मानवाधिकार कार्यकर्ता और नेशनल इंटीग्रेशन कौंसिल की सदस्य, शबनम हाशमी ने प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखकर दावा किया है कि इन अफसरों ने अदालत में इस तरह का हलफनामा इसलिए जमा किया जिससे किसी मजबूत एस.आई.टी. का गठन न किया जा सके और यह संदेश दिया जा सके कि केंद्र सरकार भी इशरत जहां के फर्जी मुठभेड़ को फर्जी नहीं मानती। अगर एस.पी. तमांग की जांच का नतीजा न आया होता तो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तो इस जांच को रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि गृह मंत्रालय के उन अफसरों को कहें कि वे राष्ट्र से माफी मांगें जो इस जघन्य हत्याकांड पर परदा डालने की कोशिश कर रहे थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;--लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई न्यूज चैनलों व अखबारों में काम कर चुके हैं. उनसे संपर्क करने के लिए  sheshji@gmail.com का सहारा ले सकते हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;-साभार - भड़ास4मीडिया&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8303159118575992866-7669671876814923146?l=muslimsviews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://muslimsviews.blogspot.com/feeds/7669671876814923146/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8303159118575992866&amp;postID=7669671876814923146' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/7669671876814923146'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/7669671876814923146'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://muslimsviews.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='क्योंकि इशरतजहां मुसलमान थी'/><author><name>Muslims Views</name><uri>http://www.blogger.com/profile/12277674573030441244</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8303159118575992866.post-6747147165214737127</id><published>2009-08-24T13:10:00.000-07:00</published><updated>2009-08-24T13:38:48.622-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संघ और मुसलमान'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='जिन्ना और भारतीय मुसलमान'/><title type='text'>संघ का प्रलाप</title><content type='html'>संघ परिवार जिन्ना पर पुस्तक लिखने वाले जसवंत सिंह को निकाले जाने के बाद अब भी इस मुद्दे पर प्रलाप की मुद्रा में है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जिन्ना प्रेम के लिए भाजपा से निकाले गए नेता जसवंत सिंह की जहां जम कर खबर ली है वहीं यह भी जता दिया है कि 2005 में पाकिस्तान के संस्थापक को बताने वाले लाल कृष्ण आडवाणी के आचरण को उसने अभी भुलाया नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; संघ ने जसवंत सिंह या उनकी पुस्तक का नाम लिए बिना कहा कि भारतीय जनमानस में जिन्ना को  महात्मासाबित करने के प्रयास हो रहे हैं लेकिन समय ही बताएगा कि ये कोशिशें कहां तक कामयाब होती हैं. पाकिस्तान यात्रा के दौरान आडवाणी द्वारा जिन्ना को महान बताए जाने पर भी परोक्ष प्रहार करते हुए संघ के मुखपत्र पांचजन्य के संपादकीय में कहा गया, शोध का विषय होगा कि जिन्ना की प्रारंभिक राजनीति सेक्युलर थी या पाकिस्तान के गठन के बाद उनके एक भाषण में अल्पसंख्यकों की ओर हमदर्दी का हाथ बढ़ाने मात्र से वह पाकिस्तान के हिन्दुओं के प्रति उदार हो गए। 2005 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान आडवाणी ने जिन्ना के संविधानसभा में दिए इस भाषण के हवाले से ही उन्हें घोषित कर दिया था, जिसकी कीमत उन्हें भारत आने पर भाजपा के अध्यक्ष पद से हट कर चुकानी पड़ी।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;संपादकीय में कहीं भी सरदार पटेल का नाम नहीं लिया गया और जिन्ना की इस बात के लिए आलोचना की गई कि उन्होंने हमेशा गांधी, पंडिल जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आज़ाद के लिए अभद्र और गाली-गलौच वाली भाषा का प्रयोग कर इन नेताओं का अपमान किया। जिन्ना ने कांग्रेस को हिंदू पार्टी, गांधी, नेहरू और अन्य कांग्रेसी नेताओं को हिन्दू नेता तथा मौलाना आज़ाद को गुलाम बताकर हमेशा उनका तिरस्कार किया। इसमें कहा गया कि 1976 में जिन्ना की जन्मशती के मौके पर पाकिस्तान सरकाार ने उनकी छवि उबारने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया और अध्ययन पत्र तथा पुस्तकें लिखने के लिए बड़े पैमाने पर धन देना शुरू किया। अमेरिका, यूरोप और एशिया के विद्वान इस मुहिम में जुट गए। संघ ने कहा कि देश के विभाजन और उसके चलते लाखों लोगों के कत्लेआम के लिए जिम्मेदार जिन्ना को पाकिस्तान अब इस तरह के हथकंंडो से महात्मा गांधी, अब्राहम लिंकन और नेल्सन मंडेला की कतार में लाने का प्रयास कर रहा है। इन सबसे भारत में जिन्ना की छवि नहीं बदलने वाली है। इस दिशा में की गई हर कोशिश को नाकामी ही हाथ लगेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संघ वालों को एक शर्म जो नहीं आ रही है कि आडवाणी ने तुम लोगों पर जो कालिख पोती और उसके बाद जसवंत सिंह ने लिखित रूप से उस कालिख को और गाढ़ा बनाकर पोता...फिर भी और थूका फजीहत से बाज नहीं आ रहे हैं। अब अगली बार कोई और पुराना स्वयंसेवक इससे भी ज्यादा जिन्ना को महिमा मंडित करे तब संघ वाले क्या करेंगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;एक और बड़े संघी का रोना-धोना &lt;/span&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;बीजेपी के पूर्व नेता गोविंदाचार्य ने आज कहा कि जसवंत सिंह को पार्टी से निकाला जाना हड़बड़ी में किया गया नादानी का काम है और जिन्ना के बारे में आडवाणी इससे कहीं ज्यादा बोले थे।&lt;br /&gt;गोविंदाचार्य ने कहा, जसवंत सिंह को पार्टी निकाला जाना आपसी लड़ाई, स्वार्थ, टकराव का नतीजा है और पार्टी के भीतर संवादहीनता की स्थिति पैदा हो गई है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने का विषय जिन्ना थे या सरदार पटेल. उन्हें निकाले जाने का तरीका फूहड़ और भौंडा था। उन्होंने कहा, जसवंत सिंह को हड़बड़ी में निकााला गया। अगर एक  सप्ताह समय लेकर किताब को पढ़ लेते तो क्या बिगड़ जाता। बीजेपी जैसी पार्टी के लिए ऐसी अपरिपक्वता ठीक नहीं है। गोविंदाचार्य ने कहा जिन्ना पर आडवाणी का पाकिस्तान में 2005 में जियो टीवी को दिया बयान ज्यादा खतरनाक  था जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन्ना का इसलिए सम्मान करता हूं क्योंकि उन्होंने अकेले पाकिस्तान बनाया। जिन्ना के बारे में उन्होंने कहा, जिन्ना न हिंदू थे और न ही मुसलमान-वह एक नास्तिक, सिद्धांतहीन और निर्मम व्यक्ति थे। उनका दामन भारत-पाक विभाजन के समय मारे गए लाखों लोगों के खून से दागदार है। इस पाप से सने हुए जिन्ना जैसे नास्तिक व्यक्ति को कोई क्लिनचीट नहीं दे सकता है। उन्होंने कहा कि जिन्ना का इस्लाम में कोई विश्वास नहीं था और केवल सियासत के लिए उन्होंने धर्म का इस्तेमाल किया।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;गोविंदाचार्य ने कहा विपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती के साथ उठाए और जरूरत पड़े तो सरकार को जनता की ओर ध्यान देने के लिए मजबूर करे। लेकिन विपक्ष के रूप में बीजेपी का स्वरूप आज कांग्रेस का हो गया है। बीजेपी आज निश्चित तौर पर विचारधारा से भटकी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;उपसंहार...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुल मिलाकर बीजेपी जिस पार्टी का नाम है और उस कठपुतली को चलाने वाला संघ परिवार की यह उठापटक बताती है कि अब इन बहरूपियों का जनता के बीच अंत निकट है। बीजेपी के लिए पत्रकारिता को कलंकित कर चुके अरुण शौरी ने भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर हमला बोल दिया है। मतलब कि इस पार्टी की कलह बढ़ती ही जा रही है। जनता इन्हें बहुत जल्द सबक सिखा देगी। लेकिन दुखद यह है कि कांग्रेस पर अंकुश रखने के लिए एक प्रमुख विपक्षी पार्टी का होना भी जरूरी है। बीजेपी से तो हम लोग उम्मीद छोड़ दें। अब किसी और विकल्प पर विचार हो या कोई विकल्प खुद खड़ा हो, तभी कुछ बात बनेगी। अब जो भी हो इंतजार करना ही पड़ेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8303159118575992866-6747147165214737127?l=muslimsviews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://muslimsviews.blogspot.com/feeds/6747147165214737127/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8303159118575992866&amp;postID=6747147165214737127' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/6747147165214737127'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/6747147165214737127'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://muslimsviews.blogspot.com/2009/08/blog-post_24.html' title='संघ का प्रलाप'/><author><name>Muslims Views</name><uri>http://www.blogger.com/profile/12277674573030441244</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8303159118575992866.post-2697559944374914741</id><published>2009-08-24T06:44:00.000-07:00</published><updated>2009-08-24T06:46:07.808-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='बाबरी मसजिद विवाद'/><title type='text'>बाबरी मस्जिद का ताजा घटनाक्रम</title><content type='html'>अयोध्या में बाबरी मसजिद के स्वामित्व संबंधी विवाद से जुड़ी 23 गायब फाइलों की तलाश के संबंध में सीबीआई ने आज उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में अंतरिम प्रगति रिपोर्ट दाखिल की।&lt;br /&gt;  सीबीआई की तरफ से एडिशनल सालीसिटर जनरल डा. अशोक निगम ने आज यह रिपोर्ट न्यायमूर्ति एस आर आलम, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी वी शर्मा की विशेष पूर्ण पीठ के सामने समक्ष एक बंद लिफाफे में दाखिल की।&lt;br /&gt;  गौरतलब है कि अदालत ने 15 जुलाई को दिये अपने आदेश में उक्त मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए इस संबंध में हुई प्रगति की आज अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिये थे।&lt;br /&gt;  अदालत के सवालों के जवाब में डा. निगम ने बताया कि राज्य सरकार की तरफ से गायब फाइलों की तलाश में सीबीआई को पूरा सहयोग मिल रहा है और वह सीबीआई अदालत द्वारा निर्धारित समय सीमा 21 सितम्बर तक जांच पूरा कर लेंगे।&lt;br /&gt; डा. निगम ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि रिपोर्ट को बंद लिफाफे में ही रखा जाए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8303159118575992866-2697559944374914741?l=muslimsviews.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://muslimsviews.blogspot.com/feeds/2697559944374914741/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8303159118575992866&amp;postID=2697559944374914741' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/2697559944374914741'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8303159118575992866/posts/default/2697559944374914741'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://muslimsviews.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='बाबरी मस्जिद का ताजा घटनाक्रम'/><author><name>Muslims Views</name><uri>http://www.blogger.com/profile/12277674573030441244</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' 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